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कान्हाई

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रंग  रात्री  उसका ,  हृदय  मोती  जैसा ,  आँ खे  चमके  तारो     सी ,  तेज़  चेहरे  का           जै से  सूर्य  नभ  में  हो  दमका , मोर  पंख  सिर  पर  साजे ,  मन  में  शीतल  चाँ दनी  विराजे । गोकुल  का  वो  राजकुमार ,  लेकिन  माखन  चो र  नाम  से  चर्चे  हर  एक  गलीं  में  बाजे । कर  इकट्ठे  छोटे - छोटे  ग्वाले ,  बाँसु री  होंठ  से  लगा कर   मधुर  धुन  सूनावे । गोपियों  संग  करे  अठखेलियाँ ,    लीला एँ  उसकी  सारी  अधभूत  पहेलियाँ । कभी  गोवर्धन  अपनी  कनिष्ठा  पर  उठायें ,   कभी  पूतना  को   मार  भगायें । समझा  था  कंस  ने  जिसे  नन्हा  सा  ग्वाल , व...