Posts

भगत सिंह

Image
जिसके   रगों   में   लहू   से   ज़्यादा   बहता   भारत   था   जिसका   हौंसला   एक   मज़बूत   इमारत   था   जिसके   जिस्म   में   आज़ादी   की   ख़ुश्बू   महकती   थी जिसके   साँसो   में   आज़ादी   की   आग   दहकती   थी जिसके   कंधो   पर   सूर्य   चमकता   था जिसके   क़दमों   से   चट्टान   चटकता   था   जिसकी   बोली   में   सिंह   गरजता   था जिसके   चेहरे   पर   तेज़   लहकता   था यह भगत   सिंह   कहलाता   था ,  यह   भगत   सिंह   कहलाता   है ,  यह   सिर्फ़   भगत   सिंह   कहलाएगा   ।

हाँ लब यह कुछ कह न सके ।

Image
काश कह दिया होता उसे कुछ , वरना यूँ आज अकेले न होते नजरें मिली भी थी , नजरें हमने चुराई भी थी बहाने से उसे देखा भी था इंतजार उसका किया भी था बस कुछ कह न सके , हाँ लब यह कुछ कह न सके । एक मुस्कान थी उसके चेहरे पर ,जिसे मै पढ़ न सका शायद कुछ इशारा किया था उसने , जिसे मैं समझ न सका जब पास वोह आई दिल तेज धड़का जरुर था जब वोह दूर गई दिल थम सा जरुर गया था बस कुछ कह न सके , हाँ लब यह कुछ कह न सके । उसका चेहरा कुछ ऐसा नर्म सा था, जिसे देखने के लिए मैं कुछ बेशर्म सा था आँखों पर उसके चश्मा चढ़ा था,देखने में जो थोडा सा बड़ा था चश्में के पीछे निगाहें छुपी थी, जिस में शायद कोई इशारा था पर मैं उन्हें समझ न सका, हाँ मैं कुछ समझ न सका बस कुछ कह न सके , हाँ लब यह कुछ कह न सके । उसका एहसास कुछ ऐसा था, जैसे नशा हो कोई आजादी की तलाश मैं कैदी फंसा हो कोई  इससे पहले भी ऐसा नशा हुआ है मुझे , लेकिन यह नशा सिर चढ़कर बोला, हाँ कुछ अलग था यह लेकिन बस हम कुछ कह न सके , हाँ लब यह कुछ कह न सके ।

ज़िंदगी की सबसे बड़ी पहेली ज़िंदगी है

Image
इक क्षण में अश्रु बहे इक क्षण में मुस्कान खिले ज़िंदगी की सबसे बड़ी पहेली ज़िंदगी है किस तरह यह उलझन खुले किस राह मैं दौड़ो किस राह मैं निहारू दो राह में अक्सर उलझ जाऊँ ज़िंदगी की सबसे बड़ी पहेली ज़िंदगी है किस तरह यह उलझन सुलझाऊँ हाँथों की बिखरी लकीरें माथे की अधूरी तक़दीरें चेहरे की पूरी उदासी अक्सर मुझसे यह सवाल पूछें ज़िंदगी की सबसे बड़ी पहेली ज़िंदगी है किस तरह यह उलझन खुले रातों में मेरी नींदे अधूरी साँसे कभी आधी कभी पूरी धड़कनो से मेरी यह हिसाब पूछे ज़िंदगी की सबसे बड़ी पहेली ज़िंदगी है किस तरह यह उलझन सुलझे

कान्हाई

Image
रंग  रात्री  उसका ,  हृदय  मोती  जैसा ,  आँ खे  चमके  तारो     सी ,  तेज़  चेहरे  का           जै से  सूर्य  नभ  में  हो  दमका , मोर  पंख  सिर  पर  साजे ,  मन  में  शीतल  चाँ दनी  विराजे । गोकुल  का  वो  राजकुमार ,  लेकिन  माखन  चो र  नाम  से  चर्चे  हर  एक  गलीं  में  बाजे । कर  इकट्ठे  छोटे - छोटे  ग्वाले ,  बाँसु री  होंठ  से  लगा कर   मधुर  धुन  सूनावे । गोपियों  संग  करे  अठखेलियाँ ,    लीला एँ  उसकी  सारी  अधभूत  पहेलियाँ । कभी  गोवर्धन  अपनी  कनिष्ठा  पर  उठायें ,   कभी  पूतना  को   मार  भगायें । समझा  था  कंस  ने  जिसे  नन्हा  सा  ग्वाल , व...

अपूर्ण....!

Image
अपूर्ण ..... हाँ अपूर्ण हूँ मै, हाँ अपूर्ण है तू न जाने कब पूर्ण होंगे यह सवाल ही अपूर्ण है कौन पूर्ण है यहाँ, यह सवाल ही अपूर्ण है रिश्ते अपूर्ण है, बादल बरसते अपूर्ण है अँधेरा अपूर्ण है, रौशनी अपूर्ण है जवानी अपूर्ण है, किसी की कहानी अपूर्ण है कहीं कसमें अपूर्ण है, कुछ रस्में अपूर्ण है न जाने कब पूर्ण होंगे यह सवाल ही अपूर्ण है जिंदगी चलती है, उम्रे घटती है समय गुजरता है, पल बीतता है यह लम्हाँ अपूर्ण है और कुछ ख्वाहिशें अपूर्ण है कहीं राते अपूर्ण है, किसी के सपने अपूर्ण है, कुछ अपने अपूर्ण है, कुछ पराये अपूर्ण है कभी साथ चलने वाला साया अपूर्ण है न जाने कब पूर्ण होंगे यह सवाल ही अपूर्ण है यहाँ मुस्कुराहटें अपूर्ण है, कुछ चाहतें अपूर्ण है किसी का वादा अपूर्ण है, कभी इरादा अपूर्ण है उसका होंसला अपूर्ण है,इसकी उम्मीदे अपूर्ण है तेरा प्यार अपूर्ण है , मेरा इंतजार अपूर्ण है  न जाने कब पूर्ण होंगे यह सवाल ही अपूर्ण है कहीं धूप अपूर्ण है, किसी के सिर छाँव अपूर्ण है आज कुछ यादे अपूर्ण, कुछ बाते अपूर्ण है कुछ शर्ते अपूर्ण है, किसी की मेहनत अपूर्ण है...

कर्म करले थोड़ा ।

Image
अपनी किस्मत पर जब रोना आया हाथ रख माथे पर अपना सिर घुमाया आँसूओं से आँखे-दिल भर आया तब किस्मत को खूब सुनाया उसको तो देती सबकुछ है मेरी तो न परवाह तुझको  माँगा था जो-जो भी मैंने दे दिया तूने वोह सब उसको उसमे तो ऐसा कुछ भी न था मेहरबान हुई तू क्यों उसपर मुझको तो न भाता यह सब खाली है मेरा खाता अब तक     अरे छोड़ दिया तूने मुझको ऐसे परवाह न होती टूटे पंखो की पंछी को जैसे   क्या कमी थी मुझमे ऐसी,मुश्किल दी तूने कैसी जिसपे तू मेहरबान है वो तो इसके न लायक था मेहनत दिनभर करके तुझको परेशान करता था मै तो आराम करके,तुझको परेशान न करता था उसमे तो ऐसा कुछ भी न था मेहरबान हुई तू क्यों उसपर मुझको तो न भाता यह सब खाली है मेरा खाता अब तक किस्मत बोली मै तो कर्मो के खेल पर चलती हूँ मेहनत करता जो उसके गले आकर लगती हूँ तो तू दिनभर सोता था,ख्यालो में ही खोता था उसने  मेहनत से दिनरात न कभी हार मानी मै तो देती सबको बराबर मौका हूँ सपने देखना छोड़ अब कर्म करले थोडा कर्मो ने ही किस्मत को अपनी ओर है मोड़ा ।

यहाँ ,हर एक इंसान न जाने कैसी पहेली है।

Image
यहाँ ,हर एक इंसान न जाने कैसी पहेली है हर पल खेलता न जाने कैसी अठखेली है। कोई उस खुदा से फरियाद करता है कोई उस खुदा की फरियाद करता है यहाँ ,हर एक इंसान न जाने कैसी पहेली है हर पल खेलता न जाने कैसी अठखेली है। कोई जीत की दुआएँ करता है कोई जीत कर दुआएँ करता है , यहाँ ,हर एक इंसान न जाने कैसी पहेली है हर पल खेलता न जाने कैसी अठखेली है। कोई एक हँसी पाने के लिए रोता है कोई हँसते-हँसते रो देता है यहाँ ,हर एक इंसान न जाने कैसी पहेली है हर पल खेलता न जाने कैसी अठखेली है। कोई अपनों के लिए रोता है कोई अपनों के वजह से रोता है यहाँ ,हर एक इंसान न जाने कैसी पहेली है हर पल खेलता न जाने कैसी अठखेली है। कोई सम्पति-सम्पदा के लिए रोता है कोई सम्पति-सम्पदा पाकर भी रोता है, यहाँ ,हर एक इंसान न जाने कैसी पहेली है हर पल खेलता न जाने कैसी अठखेली है। कोई सिर्फ सपनों में ही खोया रहता है कोई अपने सपनों को हक़ीकत बनाता है, यहाँ ,हर एक इंसान न जाने कैसी पहेली है हर पल खेलता न जाने कैसी अठखेली है । कोई चलता है, लड़खड़ाता है, गिर जाता है, कोई लड़खड़ाता है, गिर जाता है और फिर से च...